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Wednesday, April 23, 2008

रंग बिरंगी मछलियाँ (२)

जैसा की हमने अपनी पिछली पोस्ट मे कहा था की हम इन खूबसूरत और प्यारी मछलियों का विडियो लगायेंगे तो लीजिये हाजिर है विडियो

इन मछलियों को भी जैसे हम लोगों की आवाज और खुशबू पता चल जाती थी क्यूंकि जब हम लोग pond के पास जाते थे तो अक्सर ये लोग पानी मे नीचे की तरफ़ रहती थी या pond मे पड़े पौधों मे छिपी रहती थी पर बुलाने पर बाहर जाती थीऔर पूरे समय इधर-उधर तैरती रहती थी pond मे देखने पर लगता था की थोडी बड़ी हो रही हैऔर इन्हे इस तरह तैरता हुआ देखने मे बहुत अच्छा लगता था अगर एक मछली भी कम दिखती तो लगता था की कहीं मछली मर ना गई हो इसलिए अक्सर हम लोग इनकी गिनती करते रहते थे


ये दोनों विडियो जरा बड़े है


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Tuesday, April 15, 2008

रंग-बिरंगी मछलियाँ (१)

कैरी को पालने के पहले हमने दिल्ली मे बिल्ली(खरगोश,चिडिया,तोता ,मछली,छोटा वाला कछुआ पाला था ) और अंडमान मे भी मछलियाँ पाली थी तो चलिए आज हम आप लोगों को अपनी अंडमान की मछलियों से मिलवाते है अंडमान मे हमारे घर मे एक pond था अब घर मे खाली pond तो किसी को भी नही भाता इसलिए हम लोगों ने उस pond मे कुछ ornamental fish यानी रंग-बिरंगी मछलियाँ लाकर डाल दी थीअंडमान मे समुन्द्र तो था पर वहां घर के लिए अगर मछलियाँ पालनी हो तो जरा मुश्किल आती थी बस दो या तीन दूकान ही थी जहाँ ऐसी मछली मिलती थी और वो भी बहुत महंगी

खैर जंगली घाट मे एक दूकान थी वहां से हम लोग करीब जोड़े अलग-अलग तरह के लेकर आए थे और उन्हें इस pond मे डाल दिया थामछली खरीदते समय इस बात का ध्यान रक्खा था की शार्क मछली को ना खरीदे क्यूंकि शार्क बाकी गोल्डेन,ब्लैक वगैरा को जल्दी मार देती हैमछलियों को खरीदने के साथ-साथ उनके लिए दाने वगैरा भी खरीदे सुबह उठते ही पहला काम होता था बाहर जाकर pond मे मछलियों को देखना और उन्हें बाहर बुलाना ,उन्हें खाने के लिए दाने डालना और उनसे बात करना इन मछलियों को लाई (मुरमुरा) खाना भी बहुत पसंद थासुबह-सुबह इन्हे देख कर मन खुश हो जाता था(बांयी फोटो मे मछलियाँ गप्पे मारती हुई और दाहिनी फोटो मे मुरमुरा या लाई खाने के लिए आई है। )
वैसे ये समझ जाता है की मछली पालना बहुत ही आसान होता है पर ऐसा भी नही है इन सुन्दर और प्यारी मछलियों को भी देख-भाल की खूब जरुरत होती है पानी साफ होना और दाने ज्यादा ना खा जाएं इस बात का ध्यान रखना होता था क्यूंकि अगर ये दाने ज्यादा खा जाती है तो भी मर जाती है दिल्ली मे जब हम लोग फिश पोंड मे मछलियाँ पालते थे तो अक्सर ऐसा ही होता था

हालांकि ये थी सिर्फ़ बारह ही और एक बहुत ही छोटी सी रोहू भी थीअब वो रोहू थी या नही पता नही पर सब उसे कहते रोहू थे। हर मछली का अपना अलग स्टाइल था काली मछली बहुत ही लेट लतीफ टाइप की थी और ज्यादातर पानी मे नीचे ही रहना पसंद करती थी और ओरंज और ब्लैक बहुत ही तेज थी जैसे ही खाना डालते थे ये दोनों फटाफट जाती थी खाने के लिए और जब तक काली वाली आती थी तब तक खाना ख़त्म हो चुका होता था और हमे दोबारा उनके लिए खाना डालना पड़ता थाएक दिन अचानक सुबह देखा तो काली मछली पानी मे ऊपर गई थी बाद मे पता चला की वो मर गई थीऔर दो दिन के अंदर ही दोनों काली वाली मछलियाँ मर गई थी


जब हम लोग अंडमान से गोवा आने लगे थे तो हमने अपनी इन मछलियों को अपनी एक दोस्त को दे दिया थाऔर इस फोटो मे वो उसके घर के aquarium मे है अपने घर के pond मे तो ये मछलियाँ ज्यादा बड़ी नही लगती थी पर दोस्त के घर के pond मे काफ़ी बड़ी लग रही थी

अगली पोस्ट मे इन प्यारी मछलियों का हम विडियो लगायेंगे