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Tuesday, June 3, 2008

बारिश और कैरी


मई मे गोवा मे बहुत गर्मी पड़ने लगती है . एक तो उमस और उस पर से खूब कड़ी धूप पर रविवार शाम से गोवा मे बारिशशुरू हो गयी है और इस बारिश का मजा हम लोगों के साथ-साथ कैरी महाशय ने भी उठाया आख़िर कैरी को भी तो गर्मी से राहत मिली है ना

बारिश शुरू होने के पहले जब बादल गरजते है और बिजली चमकती है तो कैरी डर जाता है और हम लोगों के पास आकर बैठ जाता हैऔर जब बारिश शुरू हो जाती है तो कुछ देर तो उसे कुछ समझ नही आता हैपर थोडी देर बाद वो भी बारिश का आनंद लेने लगता हैऔर कभी-कभी बीच-बीच मे भौंकता भी जाता हैकिसे भौंकता है पता नहीशायद बारिश से बहस करता होगा। :)

Saturday, April 12, 2008

दुखी कैरी

जानवर इंसानों से ज्यादा भावुक होते है।ये जरुर है की ये बेजुबान बोल तो नही सकते है पर फ़िर भी इनकी आंखों और इनके हाव-भाव से इनके दुखी होने का पता चल ही जाता है। यूं तो कैरी शक्ल से भी थोड़े दुखी राम (पर घर आने वाले दूसरे लोगों को डरावने) लगते है पर आजकल हमारा कैरी भी ऐसे ही दुःख मे है। कल हमारा बड़ा बेटा दिल्ली चला गया और उसके जाने के बाद से ही कैरी बिल्कुल चुप -चुप सा हो गया है। बस हर समय हम लोगों के आस-पास ही बैठा रहता है ।एक अजीब सा सूना पन उसकी आंखों मे दिख रहा है ।

कैरी जो हमारे बेटे को बिल्कुल अपने बराबर समझता है । उससे बिल्कुल बराबरी से खेलना ,फ़ुटबॉल के लिए झपटना और यहां तक की कार मे बैठने मे भी पूरी सीट पर कैरी अपना ही कब्जा चाहते है।

जब भी कोई कहीं जाने के लिए अटैची या बैग निकालता है तो कैरी समझ जाते है की कोई घर से बाहर जा रहा है । और कैरी सामान के आस-पास मंडराने लगते है। और एक दिन पहले से कैरी की आँखें एहसास हो गया था की बेटा कहीं जाने वाला है क्यूंकि जब परसों बेटा पैकिंग कर रहा था तो कैरी को एहसास हो गया था की वो बाहर जाने वाला है।

सुबह जब एअरपोर्ट जाने के लिए निकले तो कैरी ने एक बड़ी ही दुःख भरी नजर से बेटे को देखा । बेटे ने उसे बिस्कुट दिया तोआम तौर पर जब हम लोग दरवाजा लॉक करने लगते है तो कैरी दरवाजे से बाहर निकलने की कोशिश करता है पर कल वहीं बिस्कुट के पास बैठ गया था। और जब हम और पतिदेव एअरपोर्ट से लौट कर आए तो कैरी की आँखें बेटे को ढूंढ रही थी।

वाकई हम इंसान सोचते है की ये तो जानवर है इन्हे भला किसी के आने या जाने से क्या फर्क पड़ता है। पर ऐसा बिल्कुल नही है। इन्हे भी फर्क पड़ता है


Wednesday, March 19, 2008

कैरी का परिचय




कैरी यानी हमारा प्यारा सा boxer जो अब दो साल का होने जा रहा है। आज आपको हम उसके परिवार के बारे मे बताने जा रहे है।कैरी जिसे गोवा आने के एक महीने बाद हमने यहां की एक लोकल महिला फातिमा फर्नांडिस से लिया था।फातिमा जो कि एक बहुत बूढी पतली-दुबली महिला है। और अकेले अपने एक गोद लिए हुए बच्चे और तीन बड़े-बड़े boxer के साथ रहती है।

और जब हम कैरी को देखने गए थे तब इसके माता-पिता को देख कर हम तो डर कर भाग ही खड़े हुए थे । उफ़ कितने भयानक और खौफनाक लग रहे थे सब।इतने जोर-जोर से भौंक रहे थे कि कान फट जाए।हमारे बेटे बोले कि आप डरिये मत बस उनको घूर कर देखिये तो वो चुप हो जायेंगे। पर हमे तो ऐसा लग रहा था कि अगर उन्हें मौका मिला तो बिल्कुल चीर-फाड़ कर खा जायेंगे।पर एक अच्छी बात थी कि जैसे ही फातिमा ने उन्हें अन्दर जाने को कहा सारे चुपचाप घर के अन्दर चले गए। और ये है वो तीनों बड़े boxer ।

खैर तीन महीने के कैरी को लेकर हम लोग घर आए तो सवाल ये नही था की कि कैरी रहेगा कहाँ और किसके कमरे मे।क्यूंकि हमारे बेटे तो उसे अपने कमरे मे उसे रखने के तैयार ही बैठे थे। बस हमने ये शर्त रक्खी कि कैरी हमारे कमरे मे नही आएगा। कैरी आ तो गए पर उसके बाद हमे बाजार भी जाना पड़ा बस ये ना पूछिये क्यों ,अरे भाई के खाने -पीने के लिए बर्तन वगैरा जो लाना था। और कैरी को ट्रेन करने की जिम्मेदारी भी हमने अपने बेटों को दी क्यूंकि हमे घर मे गंदगी हो ये बर्दाश्त नही था।और फ़िर शुरू हुई कैरी की ट्रेनिंग ।