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Saturday, April 12, 2008

दुखी कैरी

जानवर इंसानों से ज्यादा भावुक होते है।ये जरुर है की ये बेजुबान बोल तो नही सकते है पर फ़िर भी इनकी आंखों और इनके हाव-भाव से इनके दुखी होने का पता चल ही जाता है। यूं तो कैरी शक्ल से भी थोड़े दुखी राम (पर घर आने वाले दूसरे लोगों को डरावने) लगते है पर आजकल हमारा कैरी भी ऐसे ही दुःख मे है। कल हमारा बड़ा बेटा दिल्ली चला गया और उसके जाने के बाद से ही कैरी बिल्कुल चुप -चुप सा हो गया है। बस हर समय हम लोगों के आस-पास ही बैठा रहता है ।एक अजीब सा सूना पन उसकी आंखों मे दिख रहा है ।

कैरी जो हमारे बेटे को बिल्कुल अपने बराबर समझता है । उससे बिल्कुल बराबरी से खेलना ,फ़ुटबॉल के लिए झपटना और यहां तक की कार मे बैठने मे भी पूरी सीट पर कैरी अपना ही कब्जा चाहते है।

जब भी कोई कहीं जाने के लिए अटैची या बैग निकालता है तो कैरी समझ जाते है की कोई घर से बाहर जा रहा है । और कैरी सामान के आस-पास मंडराने लगते है। और एक दिन पहले से कैरी की आँखें एहसास हो गया था की बेटा कहीं जाने वाला है क्यूंकि जब परसों बेटा पैकिंग कर रहा था तो कैरी को एहसास हो गया था की वो बाहर जाने वाला है।

सुबह जब एअरपोर्ट जाने के लिए निकले तो कैरी ने एक बड़ी ही दुःख भरी नजर से बेटे को देखा । बेटे ने उसे बिस्कुट दिया तोआम तौर पर जब हम लोग दरवाजा लॉक करने लगते है तो कैरी दरवाजे से बाहर निकलने की कोशिश करता है पर कल वहीं बिस्कुट के पास बैठ गया था। और जब हम और पतिदेव एअरपोर्ट से लौट कर आए तो कैरी की आँखें बेटे को ढूंढ रही थी।

वाकई हम इंसान सोचते है की ये तो जानवर है इन्हे भला किसी के आने या जाने से क्या फर्क पड़ता है। पर ऐसा बिल्कुल नही है। इन्हे भी फर्क पड़ता है


Wednesday, April 2, 2008

कैरी के मॉर्निंग वाक् के साथी

पिछली पोस्ट मे हमने कैरी का परिचय और कैरी की ट्रेनिंग का जिक्र किया था तो आज कैरी के कुछ morning walk के साथियों से आप लोगों को मिलवाते है।अब यहां गोवा मे तो हर घर मे ही एक-दो doggi रहते है। कैरी की walk की ट्रेनिंग के बाद हम ने और पतिदेव ने उसे लेकर walk के लिए निकलना शुरू किया। पहले हम लोग शाम को बस थोडी दूर ही जाते थे पर फ़िर धीरे-धीरे कैरी को भी walk मे मजा आने लगा था तो हम लोगों ने morning walk के लिए जाना शुरू किया।अब तो walk कहते ही कैरी दौड़ कर बाहर जाकर खड़े हो जाते है। तो चलिए कुछ कैरी के दोस्तों से मिलवाते है।

पहले सड़क के और जिस घर के सामने से निकलते थे वहीं से जोर-जोर से भौकने की आवाजें आने लगती थी। और अब तो ये आलम है की कैरी हर घर हर गली जहाँ उनके ये साथी रहते है वहां रुक कर अपने दोस्तों को हेलो करना नही भूलते है।क्या कहा यकीन नही आ रहा है। अरे ये देखिये कैरी गेट के सामने खड़े है और उनका साथी उन्हें सुबह-सुबह सारी ख़बर दे रहा है।


और वहां से आगे चलने पर ये मिलते है । ये बहुत ही ज्यादा शोर करता है। और पूरी सड़क पर अपना राज समझते है।



दाहिनी ओर वाली फोटो मे तीन doverman दिख रहे है। इनकी खासियत ये है की ये तीनो एक-दूसरे को सपोर्ट करते हुए भौंकते है। पहले इस जगह से और फ़िर गेट पर आकर भी भौंकते है। पर पिछले डेढ़ साल से कैरी को देखते है इसलिए अब सिर्फ़ फोर्मलिटी ही करते है भौंकने की।और बस हालचाल पूछ लेते है।


और ये कुछ मिक्स breed है boxer की । ये बहुत ही खूंखार टाइप है। इसका ये हाल है की ये घर वालों के कंट्रोल मे भी नही रहता है।





और ये छोटे-छोटे उस कहावत को दर्शाते है की सूप तो सूप चलनियों बोल। और मजा ये की जब कैरी चलते रहते थे तो ये भौंकते थे पर जैसे ही कैरी रुक कर मुड़ते की ये सारे के सारे भाग कर दूर चले जाते थे।







अब इस फोटो मे जो तीन दिख रहे है मॉर्निंग वाक के अंत मे इन्ही से कैरी की हेलो होती है। ये तीनो कैरी को देखते ही भौंकना शुरू कर देते है और हमारे कैरी महाशय बैठकर उन्हें देखते-सुनते है ।



और अब तो आलम ये है की कैरी सुबह-सुबह गाना गाकर हम लोगों को उठा देते है है walk के लिएमजाल है की कोई सुबह सोता रह जाएअब तो एक रूटीन बन गया है हफ्ते के पाँच दिन तो हम लोग कैरी को अपने मोहल्ले मे ही walk कराते है पर शनिवार और रविवार को कैरी beach पर walk के लिए जाते हैजहाँ कैरी को बहुत मजा आता है

Wednesday, March 19, 2008

कैरी का परिचय




कैरी यानी हमारा प्यारा सा boxer जो अब दो साल का होने जा रहा है। आज आपको हम उसके परिवार के बारे मे बताने जा रहे है।कैरी जिसे गोवा आने के एक महीने बाद हमने यहां की एक लोकल महिला फातिमा फर्नांडिस से लिया था।फातिमा जो कि एक बहुत बूढी पतली-दुबली महिला है। और अकेले अपने एक गोद लिए हुए बच्चे और तीन बड़े-बड़े boxer के साथ रहती है।

और जब हम कैरी को देखने गए थे तब इसके माता-पिता को देख कर हम तो डर कर भाग ही खड़े हुए थे । उफ़ कितने भयानक और खौफनाक लग रहे थे सब।इतने जोर-जोर से भौंक रहे थे कि कान फट जाए।हमारे बेटे बोले कि आप डरिये मत बस उनको घूर कर देखिये तो वो चुप हो जायेंगे। पर हमे तो ऐसा लग रहा था कि अगर उन्हें मौका मिला तो बिल्कुल चीर-फाड़ कर खा जायेंगे।पर एक अच्छी बात थी कि जैसे ही फातिमा ने उन्हें अन्दर जाने को कहा सारे चुपचाप घर के अन्दर चले गए। और ये है वो तीनों बड़े boxer ।

खैर तीन महीने के कैरी को लेकर हम लोग घर आए तो सवाल ये नही था की कि कैरी रहेगा कहाँ और किसके कमरे मे।क्यूंकि हमारे बेटे तो उसे अपने कमरे मे उसे रखने के तैयार ही बैठे थे। बस हमने ये शर्त रक्खी कि कैरी हमारे कमरे मे नही आएगा। कैरी आ तो गए पर उसके बाद हमे बाजार भी जाना पड़ा बस ये ना पूछिये क्यों ,अरे भाई के खाने -पीने के लिए बर्तन वगैरा जो लाना था। और कैरी को ट्रेन करने की जिम्मेदारी भी हमने अपने बेटों को दी क्यूंकि हमे घर मे गंदगी हो ये बर्दाश्त नही था।और फ़िर शुरू हुई कैरी की ट्रेनिंग ।