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Monday, March 31, 2008

एक सुन्दरी मेरे जीवन मे (भाग-तीन)

एक सुन्दरी मेरे जीवन मे (भाग-तीन)

- पंकज अवधिया

उपचार के बाद जब सुन्दरी को वापस छोडने की बारी आयी तो हम असमंजस मे पड गये क्योकि हमे नही मालूम था कि वह किन परिस्थितियो मे छत पर गिरी थी। आमतौर पर ये पक्षी झुण्ड मे रहते है और एक बार बिछड जाने के बाद दूसरे झुंड इन्हे नही स्वीकारते है। अंत मे यह निश्चय किया गया कि सुन्दरी को अपने पास ही रखा जाये। हमारे पास एक बडा सा पिंजरा था जिसे पिताजी ने बचपन मे बनवाया था। उस समय हम लोगो ने चुनमुन चिडिया पाली थी। ये चिडिया रात को एक कोने मे सिमट कर बैठ जाती है। एक दिन पिंजरा बाहर छूट गया और बिल्ली ने सब को खा लिया। उसके बाद कभी भी चिडिया न पालने का मन बना लिया था हम लोगो ने। पर सुन्दरी के आगमन ने मन मे उत्साह भर दिया।

यह बडा पिंजरा सुन्दरी को भी खूब भाया। पर इसे सम्भालना मुश्किल था। रोज इसे साफ करना बला लगा। फिर इतने बडे पिंजरे मे सुन्दरी को ठीक से पास से देख भी नही पाते थे। इसलिये इसे थोडे छोटे पिंजरे मे रखने की कोशिश की। पर जब भी ऐसा किया गया सुन्दरी ने विद्रोह कर दिया। सब कुछ छोड के वह पिंजरे को काटने मे जुटी रहती। पास बुलाने पर गुर्राती। जब वापस बडे पिंजरे मे ले जाते तो सामान्य हो जाती। आखिर उसकी ही जीत हुयी।

आपने तो देखा ही होगा तोते को लोग कैसे छोटे से पिंजरे मे रखते है। इतने छोटे कि वह ठीक से घूम भी न सके। फिर उसके पंख भी कतर दिये जाते है। हमने यह निश्चित किया कि कभी पंख नही काटेंगे। आज तक उस निश्चय पर कायम है। कभी-कभी लगता है कि पंख काटने पर उसे हम डायनिंग टेबल पर घुमा सकेंगे। उससे और घनिष्ठ हो सकेंगे पर दूसरे ही पल यह सोच कर दुखी हो जाते है कि कही पंख कतरने से यह नन्हा सा पंछी नाराज न हो जाये। पिंजरे मे सुन्दरी मजे से उडती है। जब वह उडती है तो हम वाह,वाह, हेलीकाप्टर कहते है। शांत बैठी सुन्दरी अब तो हेलीकाप्टर शब्द मुँह से निकलते ही एक जगह पर उडने लगती है। काफी प्रफुल्लित होकर। पता नही वह इस शब्द का क्या मायने निकालती है। भविष्य़ मे उससे संवाद कायम हुआ तो उसे बतायेंगे कि हेलीकाप्टर क्या है? दिखायेंगे भी।

Wednesday, March 19, 2008

एक सुन्दरी मेरे जीवन मे (परिचय)

एक सुन्दरी मेरे जीवन मे (परिचय)

- पंकज अवधिया

एक दिन घर की छत पर हमे कुछ तोते घायल अवस्था मे मिले। उनका उपचार आरम्भ किया तो दो ही बच पाये। बाद मे एक और तोते को हम नही बचा पाये। अब जो बचा वह मेल है कि फीमेल, इसे लेकर असमंजस मे रहे। जानकार लोगो ने बताया कि यदि इसके सिर का रंग बडे होने पर लाल हुआ तो मेल होगा। पर यह तोता इतना प्यार था कि इसका नाम सुन्दरी रख दिया गया। जब सुन्दरी बडी हुयी तो पता चला कि यह तो मेल है। सबने सोचा अब इसे सुन्दरलाल पुकारा जाये पर इससे सुन्दरी दुखी रहने लगी। इसलिये सब कुछ जानते हुये भी हम सब उसे सुन्दरी कहते है। इस लिंक मे जाकर आप सुन्दरी की तस्वीरे देखिये। मेरी लेखमाला इसी के आस-पास घूमेगी।

http://ecoport.org/ep?SearchType=pdb&PdbID=103267

http://ecoport.org/ep?SearchType=pdb&PdbID=103265

http://ecoport.org/ep?SearchType=pdb&Subject=Psittacula+cyanocephala&Author=oudhia&SubjectWild=CO&Thumbnails=Only&CaptionWild=CO&AuthorWild=CO