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Tuesday, May 20, 2008

कैरी डॉक्टर और ब्लैकमेलर

अक्सर ऐसे जीव-जंतु जैसे बिल्ली,doggi जिनका खाना पेड़-पौधे नही होता है पर फ़िर भी कभी-कभी इनको पेड़-पौधे खाते हुए देखा जाता है दिल्ली मे हमारे पास जो बिल्ली थी वो भी अक्सर गार्डन मे जा कर बड़े चाव से घास-फूस खाती थी

वो
कहते है ना की जीव-जंतु अपनी छोटी-मोटी बीमारी का इलाज ख़ुद ही कर लेते है और वो भी बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से (नेचुरोपैथी )

और अब कैरी को भी हम देखते है की जब कभी कैरी की तबियत ख़राब होती है तो वो बाहर जाकर ढूंढ -ढूंढ कर कुछ ख़ास तरह की घास-फूस और पत्तियां खाता हैपर अगर हम लोग उसे वही पत्ती तोड़ कर खिलाने लगते है तो वो नही खाता है शायद सोचता हो की कहीं कुछ गड़बड़ पत्ती ना खिला दे :)


पर ऐसा नही है की हमेशा सिर्फ़ अपनी बीमारी के इलाज के लिए ही कैरी पत्ती खाता है अब जैसे इस फोटो मे हम लोग बैडमिन्टन खेल रहे थे तो कैरी को बाँध दिया था क्यूंकि वरना कैरी शैटल कॉक लेकर ही भाग जाता थातो गुस्से मे कैरी ने आव-देखा ना ताव बस दीवार मे उग आई इन पत्तियों को ही खाने लगा और हम लोगों को उसे खोलना पड़ाकैरी को भी ब्लैकमेल करना आता है। :)

Saturday, April 12, 2008

दुखी कैरी

जानवर इंसानों से ज्यादा भावुक होते है।ये जरुर है की ये बेजुबान बोल तो नही सकते है पर फ़िर भी इनकी आंखों और इनके हाव-भाव से इनके दुखी होने का पता चल ही जाता है। यूं तो कैरी शक्ल से भी थोड़े दुखी राम (पर घर आने वाले दूसरे लोगों को डरावने) लगते है पर आजकल हमारा कैरी भी ऐसे ही दुःख मे है। कल हमारा बड़ा बेटा दिल्ली चला गया और उसके जाने के बाद से ही कैरी बिल्कुल चुप -चुप सा हो गया है। बस हर समय हम लोगों के आस-पास ही बैठा रहता है ।एक अजीब सा सूना पन उसकी आंखों मे दिख रहा है ।

कैरी जो हमारे बेटे को बिल्कुल अपने बराबर समझता है । उससे बिल्कुल बराबरी से खेलना ,फ़ुटबॉल के लिए झपटना और यहां तक की कार मे बैठने मे भी पूरी सीट पर कैरी अपना ही कब्जा चाहते है।

जब भी कोई कहीं जाने के लिए अटैची या बैग निकालता है तो कैरी समझ जाते है की कोई घर से बाहर जा रहा है । और कैरी सामान के आस-पास मंडराने लगते है। और एक दिन पहले से कैरी की आँखें एहसास हो गया था की बेटा कहीं जाने वाला है क्यूंकि जब परसों बेटा पैकिंग कर रहा था तो कैरी को एहसास हो गया था की वो बाहर जाने वाला है।

सुबह जब एअरपोर्ट जाने के लिए निकले तो कैरी ने एक बड़ी ही दुःख भरी नजर से बेटे को देखा । बेटे ने उसे बिस्कुट दिया तोआम तौर पर जब हम लोग दरवाजा लॉक करने लगते है तो कैरी दरवाजे से बाहर निकलने की कोशिश करता है पर कल वहीं बिस्कुट के पास बैठ गया था। और जब हम और पतिदेव एअरपोर्ट से लौट कर आए तो कैरी की आँखें बेटे को ढूंढ रही थी।

वाकई हम इंसान सोचते है की ये तो जानवर है इन्हे भला किसी के आने या जाने से क्या फर्क पड़ता है। पर ऐसा बिल्कुल नही है। इन्हे भी फर्क पड़ता है


Monday, March 31, 2008

मिलिये हमारी सिन्ड्रेला से

आइए हम आपको मिलवाते है अपनी सिंड्रेला से, ये लेख कुछ साल पुराना है, लेकिन इस ब्लॉग के एकदम उपयुक्त दिखा, इसलिए दोबारा पब्लिश कर रहे है। क्योंकि पुरानी पोस्ट को कई नए चिट्ठाकारों ने नही पढा होगा।



Cyndrella



अब जब अतुल भाई ने कुत्तों का जिक्र छेड़ा है तो हम भी अपनी सिन्ड्रेला से आपको मिलवा दें. हमारी सिन्ड्रेला बहुत सुन्दर है और हमारे घर की सदस्य की तरह है. सिन्ड्रेला आजकल आई आई टी रूड़की मे है, नही भई कोई शोध वगैरहा नही कर रही...बल्कि हमारी साली साहिबा के घर पर पर विराजमान है.

श्वानो से मेरा प्रेम बहुत पुराना रहा है, हमारी पहली पैट थी जिनी, जो अब इस दुनिया मे नही रही, जिनी से हमारा प्यार इस हद तक था कि हम उसे अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे, और हम पति पत्नी ने अपने अपने नाम का पहला अक्षर मिलाकर उसका नाम रखा था, यानि कि जितेन्द्र और नीरू( मेरी पत्नी रितु का शादी के पहले का नाम) यानि कि जिनी.

अब सिन्डी उर्फ सिन्ड्रेला की कहानी भी सुन लीजिये, ये है 95% पूडल और 5% पामेरियन प्रजाति की. बहुत नखरे वाली है, बहुत ज्यादा मूडी है, टाम मूडी से भी ज्यादा ,नहाने के नाम पर तो इनको सांप सूंघ जाता है, इनको जैसे ही पता चलता है कि नहाने का समय हो गया है, फिर तो ये ऐसे गायब होती है, जैसे गधे के सर से सींग. इनको लाँन मे टहलना पसन्द है और चोरी चोरी छिप छिप कर किचेन गार्डन से भिन्डियाँ तोड़कर खाना ज्यादा पसन्द है. अब लाँन मे टहलने की वजह से इनके चेहरे की ये हालत होती है तो इनकी हड़काई होनी लाजिम है.

Cyndrella



इनको डर लगता है तो सिर्फ साँप से, बाकियों को ये दौड़ा मारती है. हाँ खाना खाते वक्त यदि आपने अपने हाथ से नही खिलाया तो ये नाराज भी हो जाती है, फिर मनाते रहिये, घन्टों........बच्चों से इनको विशेष प्रेम है, इसी प्रेम के चलते एक बार अपनी टाँगे तुड़वा चुकी है, बच्चों ने इनको एक ऊँची टेबिल से जम्प करवा दिया था, और प्रेम के चलते ये ना नही कर सकी....खैर अब ये कुछ ज्यादा समझदार हो गयी है, शरारती बच्चों से दूर ही रहती है.

अगले कुछ लेखों मे बात करेंगे मेरे श्वानो के प्रेम की, और मेरी पहली श्वान जिनी की, जिसकी याद आते ही आज भी मेरी आँखों मे आंसू आ जाते है।

Wednesday, March 19, 2008

कैरी का परिचय




कैरी यानी हमारा प्यारा सा boxer जो अब दो साल का होने जा रहा है। आज आपको हम उसके परिवार के बारे मे बताने जा रहे है।कैरी जिसे गोवा आने के एक महीने बाद हमने यहां की एक लोकल महिला फातिमा फर्नांडिस से लिया था।फातिमा जो कि एक बहुत बूढी पतली-दुबली महिला है। और अकेले अपने एक गोद लिए हुए बच्चे और तीन बड़े-बड़े boxer के साथ रहती है।

और जब हम कैरी को देखने गए थे तब इसके माता-पिता को देख कर हम तो डर कर भाग ही खड़े हुए थे । उफ़ कितने भयानक और खौफनाक लग रहे थे सब।इतने जोर-जोर से भौंक रहे थे कि कान फट जाए।हमारे बेटे बोले कि आप डरिये मत बस उनको घूर कर देखिये तो वो चुप हो जायेंगे। पर हमे तो ऐसा लग रहा था कि अगर उन्हें मौका मिला तो बिल्कुल चीर-फाड़ कर खा जायेंगे।पर एक अच्छी बात थी कि जैसे ही फातिमा ने उन्हें अन्दर जाने को कहा सारे चुपचाप घर के अन्दर चले गए। और ये है वो तीनों बड़े boxer ।

खैर तीन महीने के कैरी को लेकर हम लोग घर आए तो सवाल ये नही था की कि कैरी रहेगा कहाँ और किसके कमरे मे।क्यूंकि हमारे बेटे तो उसे अपने कमरे मे उसे रखने के तैयार ही बैठे थे। बस हमने ये शर्त रक्खी कि कैरी हमारे कमरे मे नही आएगा। कैरी आ तो गए पर उसके बाद हमे बाजार भी जाना पड़ा बस ये ना पूछिये क्यों ,अरे भाई के खाने -पीने के लिए बर्तन वगैरा जो लाना था। और कैरी को ट्रेन करने की जिम्मेदारी भी हमने अपने बेटों को दी क्यूंकि हमे घर मे गंदगी हो ये बर्दाश्त नही था।और फ़िर शुरू हुई कैरी की ट्रेनिंग ।

एक और नए ब्लॉग की शुरुआत

आज हम एक और नए group ब्लॉग की शुरुआत कर रहे है hamare pets (http ://hamare pets.blogspot.com) इस ब्लॉग के लिए हमे आप सभी का साथ चाहिए। इस ब्लॉग मे हम सभी अपने pets के बारे मे लिख सकते है।क्यूंकि जब हम कोई pet पालते है तो चाहे अप भी,बिल्ली हो, खरगोश हो,चिडिया या तोता हो और चाहे doggi हो , उससे एक अलग सा लगाव हो जाता है।अगर आप भी इससे जुड़ना चाहते है तो बस हमे एक -मेल कर दीजियेगा