Showing posts with label doggi. Show all posts
Showing posts with label doggi. Show all posts

Wednesday, June 11, 2008

यूरो कप फ़ुटबाल और कैरी

अब क्रिकेट ख़त्म हो गया है और यूरो कप फ़ुटबाल शुरू हो गया है।क्रिकेट का तो नही पर हाँ फ़ुटबाल का कुछ नशा हमारे कैरी पर भी नजर आ रहा है।रोज शाम को कैरी के साथ १०-१५ मिनट फ़ुटबाल खेलते है ।कैरी कभी पैर से तो कभी मुंह से फ़ुटबाल खेलता है। वैसे एक बात बता दे कैरी बहुत ही अच्छा डिफेन्स मे खेलता है । :)

जब भी हम लोग उसके साथ खेलते है तो जोर से बॉल को उछालते है(किक करते है) और कैरी उसे पकड़ने के लिए दौड़ता है और अगर हम लोग जरा सा चूक जाते है बॉल पकड़ने मे और बॉल कैरी को मिल जाती है. और जब वो बॉल ले लेता है तो छोड़ता नही है। कभी बॉल को मुंह मे लेकर इधर भागता है तो कभी उधर भागता है।

और तब उसका ध्यान हटा कर बॉल लेनी पड़ती है और अगर किक करने मे जरा देर की नही की कैरी बिल्कुल पास आकर बॉल पर कुछ ऐसे पैर रख देता है । :)

Tuesday, June 3, 2008

बारिश और कैरी


मई मे गोवा मे बहुत गर्मी पड़ने लगती है . एक तो उमस और उस पर से खूब कड़ी धूप पर रविवार शाम से गोवा मे बारिशशुरू हो गयी है और इस बारिश का मजा हम लोगों के साथ-साथ कैरी महाशय ने भी उठाया आख़िर कैरी को भी तो गर्मी से राहत मिली है ना

बारिश शुरू होने के पहले जब बादल गरजते है और बिजली चमकती है तो कैरी डर जाता है और हम लोगों के पास आकर बैठ जाता हैऔर जब बारिश शुरू हो जाती है तो कुछ देर तो उसे कुछ समझ नही आता हैपर थोडी देर बाद वो भी बारिश का आनंद लेने लगता हैऔर कभी-कभी बीच-बीच मे भौंकता भी जाता हैकिसे भौंकता है पता नहीशायद बारिश से बहस करता होगा। :)

Wednesday, May 14, 2008

कैरी के खर्राटे


क्या आप जानते है की doggi या अन्य जानवर खर्राटे लेते है. भाई हम तो यही जानते-समझते थे की सिर्फ़ इंसान ही खर्राटे मारते है पर कैरी के खर्राटे सुनकर हमे अपनी ये धारणा बदलनी पड़ी है ।कैरी जब सोते है तो बड़ी ही गहरी नींद मे सोते है और ऐसी ही गहरी नींद मे वो खर्राटे भी लेता है और आवाजें भी निकलता है। शुरू मे तो हम लोग समझ ही नही पाये की कैरी राम भी खर्राटे ले सकते है। boxer के लिए कहा जाता है की ये पीठ के बल भी सोते हैजैसा की इस फोटो मे दिख रहा है

काफ़ी शुरू की बात है जब कैरी कुछ महीने का ही था । एक दिन हम सभी ड्राइंग रूम मे बैठे थे और टी.वी.पर न्यूज़ देख रहे थे कैरी भी वहीं carpet पर सो रहा था।।हम सभी टी.वी.पर आ रही न्यूज़ मे लगे थे की बड़े-जोर-जोर से खर्राटे जैसी आवाज आने लगी और जब हम लोगों ने आवाज की और ध्यान किया तो पता चला की ये खर्राटे तो कैरी राम ले रहे थे। यकीन जानिए बाकायदा कैरी की नाक बज रही थी।

कैरी ना केवल खर्राटे लेता है बल्कि सोते हुए सपने मे वो अजीब-अजीब सी आवाजें भी निकलता है।कभी-कूं-कूं तो कभी बड़ी ही अजीब तरह से कुछ जोर-जोर से आवाज निकलता है। कभी-कभी तो हम लोगों को उसे आवाज दे कर उठाना पड़ता है। ऐसा लगता है की उसके दिमाग मे भी कुछ ना कुछ चलता रहता होगा जो उसे सपने मे दिखाई देता है। :)

Tuesday, April 29, 2008

जब कैरी पहली बार beach पर गया


कैरी को आए कुछ ही दिन हुए थे पर जब से कैरी आया था हम लोगों का घूमना-फिरना बंद हो गया था क्यूंकि कैरी को हर जगह लेकर जा नही सकते थे और घर मे उसे अकेले छोड़ नही सकते थे। एक बार कैरी अकेले घर मे छोड़ कर हम लोग डिनर करने बाहर चले गए थे तो कैरी कमरे की खिड़की से निकल कर बाहर टैरस पर चला गया था और खूब जोर-जोर से भौंक रहा था।और जैसे ही हम लोग गाड़ी से आए की एक पड़ोसी ने हम लोगों को बताया की आपका doggi बहुत देर से भौक रहा था उसे अकेले ऐसे छोड़ कर नही जाना चाहिए। बाद मे पता चला की उन पड़ोसी के पास भी doggi है।

खैर तो ऐसे ही एक सन्डे को हम लोगों ने calangute beach जाने का कार्यक्रम बनाया। और ये तय किया की अबकी कैरी को भी लेकर जायेंगे जिससे उसकी घूमने और गाड़ी मे बैठने की भी आदत पड़ जाए। पर पहली बार बाहर लेकर जाने मे हम लोगों को भी डर लग रहा था कि पता नही वो कैसे बिहेव करेगा। जैसे ही कार चली की कैरी महाशय थोडी देर तो चुप रहे और उसके बाद भौंकना शुरू कर दिया।कैरी थोडी देर चुप रहता और फ़िर कूं-कूं करने लगता। खैर २० मिनट मे beach पर पहुंचे तो वहां लोगों को देख कर कैरी राम घबडा ही गए। और जब कैरी को पानी के पास ले गए तो वो पीछे की तरफ़ भागने लगा। खैर हम सब ने उसे थोडी देर पानी के पास बिठाया और फ़िर कैरी का डर थोड़ा कम हुआ ।

beach पर कुछ लोग तो कैरी को देख कर डर जाते तो वहीं जिन्होंने doggi पाले हुए थे वो कैरी को प्यार करने लगते थे।थोडी देर बाद कैरी को भी मजा आने लगा था। और beach से वापिस लौटने मे कैरी राम इतना थक गए थे कि वो बेटे के पैर पर ही सो गए।

Monday, March 31, 2008

मिलिये हमारी सिन्ड्रेला से

आइए हम आपको मिलवाते है अपनी सिंड्रेला से, ये लेख कुछ साल पुराना है, लेकिन इस ब्लॉग के एकदम उपयुक्त दिखा, इसलिए दोबारा पब्लिश कर रहे है। क्योंकि पुरानी पोस्ट को कई नए चिट्ठाकारों ने नही पढा होगा।



Cyndrella



अब जब अतुल भाई ने कुत्तों का जिक्र छेड़ा है तो हम भी अपनी सिन्ड्रेला से आपको मिलवा दें. हमारी सिन्ड्रेला बहुत सुन्दर है और हमारे घर की सदस्य की तरह है. सिन्ड्रेला आजकल आई आई टी रूड़की मे है, नही भई कोई शोध वगैरहा नही कर रही...बल्कि हमारी साली साहिबा के घर पर पर विराजमान है.

श्वानो से मेरा प्रेम बहुत पुराना रहा है, हमारी पहली पैट थी जिनी, जो अब इस दुनिया मे नही रही, जिनी से हमारा प्यार इस हद तक था कि हम उसे अपने बच्चे की तरह प्यार करते थे, और हम पति पत्नी ने अपने अपने नाम का पहला अक्षर मिलाकर उसका नाम रखा था, यानि कि जितेन्द्र और नीरू( मेरी पत्नी रितु का शादी के पहले का नाम) यानि कि जिनी.

अब सिन्डी उर्फ सिन्ड्रेला की कहानी भी सुन लीजिये, ये है 95% पूडल और 5% पामेरियन प्रजाति की. बहुत नखरे वाली है, बहुत ज्यादा मूडी है, टाम मूडी से भी ज्यादा ,नहाने के नाम पर तो इनको सांप सूंघ जाता है, इनको जैसे ही पता चलता है कि नहाने का समय हो गया है, फिर तो ये ऐसे गायब होती है, जैसे गधे के सर से सींग. इनको लाँन मे टहलना पसन्द है और चोरी चोरी छिप छिप कर किचेन गार्डन से भिन्डियाँ तोड़कर खाना ज्यादा पसन्द है. अब लाँन मे टहलने की वजह से इनके चेहरे की ये हालत होती है तो इनकी हड़काई होनी लाजिम है.

Cyndrella



इनको डर लगता है तो सिर्फ साँप से, बाकियों को ये दौड़ा मारती है. हाँ खाना खाते वक्त यदि आपने अपने हाथ से नही खिलाया तो ये नाराज भी हो जाती है, फिर मनाते रहिये, घन्टों........बच्चों से इनको विशेष प्रेम है, इसी प्रेम के चलते एक बार अपनी टाँगे तुड़वा चुकी है, बच्चों ने इनको एक ऊँची टेबिल से जम्प करवा दिया था, और प्रेम के चलते ये ना नही कर सकी....खैर अब ये कुछ ज्यादा समझदार हो गयी है, शरारती बच्चों से दूर ही रहती है.

अगले कुछ लेखों मे बात करेंगे मेरे श्वानो के प्रेम की, और मेरी पहली श्वान जिनी की, जिसकी याद आते ही आज भी मेरी आँखों मे आंसू आ जाते है।

Saturday, March 29, 2008

कैरी की ट्रेनिंग

कैरी के घर मे आने के बाद सबसे पहले तो डॉक्टर की खोज शुरू हुई क्यूंकि फातिमा फर्नांडिस ने उस समय तक कैरी को कोई भी वैक्सीन नही लगवाया थाअब इस अनजानी जगह मे किस्से पूछते सो फातिमा को ही फ़ोन किया और उनसे डॉक्टर का फ़ोन नम्बर लिया और उसे घर पर ही आने के लिए कहा क्यूंकि कैरी को हॉस्पिटल ले जाने मे डर लगता था की पता नही वहां रुकेगा भी या नही

कैरी की सबसे पहली ट्रेनिंग खाने की शुरू की गई जिससे उसे समय पर खाना खाने की आदत रहेखाने के लिए फातिमा ने बताया था की इसे दूध, सेरेलक ,खिचड़ी मीट,वगैरा देती थी सो हमने भी वही सब देना शुरू कियाधीरे-धीरे खाने मे बदलाव आता गया अंडा,चिकेन ,रोटी ,सब्जी ,दही वगैरा भी देना शुरू कियाहम कैरी को सिर्फ़ मांसाहारी खाने पर नही रखना चाहते थेक्यूंकि हमने सुना है की सिर्फ़ मांसहारी खाना खाने से doggi ज्यादा वोइलेंट होते है

और फ़िर शुरू हुई ट्रेनिंग बिस्तर पर और ड्राइंग रूम मे सोफे पर ना चढ़ने की क्यूंकि हमे कैरी से प्यार तो था पर उसका बिस्तर पर चढ़ना गवारा नही थाहाँ बेटों के रूम और बिस्तर पर कैरी अपना पूरा अधिकार समझता हैपर कैरी ना तो हमारे कमरे मे आता था और ना ही बिस्तर पर चढ़ता थाबस हमारे कमरे के दरवाजे पर ही बैठ जाता था

और अब आई असली ट्रेनिंग की बारी यानी walk करने कीशुरू मे घर मे walk कराया गया तो लीश पर चलता ही नही थाजहाँ लीश बांधते की वो उछलने लगता थाखैर रोज शाम को आधे घंटे का ट्रेनिंग कार्यक्रम चलता रहा और थोड़े दिन उसने ठीक से walk करना सीख लिया। कैरी ने जब ठीक से लीश पर चलना शुरू किया तो घर के पास थोड़ा थोड़ा walk के लिए बाहर निकलना शुरू कियाऔर फ़िर रोज शाम को walk के लिए घर से बाहर निकलना शुरू कियापहले तो हमने कह दिया था की हम कैरी को टहलाने नही जाया करेंगे पर बाद मे हम और पतिदेव ही कैरी को walk के लिए ले जाने लगेइसे लेकर जब हम लोग बाहर निकलते थे तो ऐसा लगता था मानो सारे शहर के doggi इसके पीछे पड़ गए होऔर कैरी बेचारा डर के मारे वापिस घर की ओर भागने लगता थाऔर कैरी से ज्यादा हमे डर लगता की अगर कहीं सब doggi ने अटैक कर दिया तो हम किसको बचायेंगेपर जल्द ही ये डर ख़त्म हो गया क्यूंकि जब रोज-रोज walk के लिए जाने लगे तो सब कैरी को पहचानने लगे थे