इन मछलियों को भी जैसे हम लोगों की आवाज और खुशबू पता चल जाती थी। क्यूंकि जब हम लोग pond के पास जाते थे तो अक्सर ये लोग पानी मे नीचे की तरफ़ रहती थी या pond मे पड़े पौधों मे छिपी रहती थी। पर बुलाने पर बाहर आ जाती थी।और पूरे समय इधर-उधर तैरती रहती थी। pond मे देखने पर लगता था की थोडी बड़ी हो रही है।और इन्हे इस तरह तैरता हुआ देखने मे बहुत अच्छा लगता था। अगर एक मछली भी कम दिखती तो लगता था की कहीं मछली मर ना गई हो । इसलिए अक्सर हम लोग इनकी गिनती करते रहते थे।
ये दोनों विडियो जरा बड़े है।
