Saturday, March 29, 2008

कैरी की ट्रेनिंग

कैरी के घर मे आने के बाद सबसे पहले तो डॉक्टर की खोज शुरू हुई क्यूंकि फातिमा फर्नांडिस ने उस समय तक कैरी को कोई भी वैक्सीन नही लगवाया थाअब इस अनजानी जगह मे किस्से पूछते सो फातिमा को ही फ़ोन किया और उनसे डॉक्टर का फ़ोन नम्बर लिया और उसे घर पर ही आने के लिए कहा क्यूंकि कैरी को हॉस्पिटल ले जाने मे डर लगता था की पता नही वहां रुकेगा भी या नही

कैरी की सबसे पहली ट्रेनिंग खाने की शुरू की गई जिससे उसे समय पर खाना खाने की आदत रहेखाने के लिए फातिमा ने बताया था की इसे दूध, सेरेलक ,खिचड़ी मीट,वगैरा देती थी सो हमने भी वही सब देना शुरू कियाधीरे-धीरे खाने मे बदलाव आता गया अंडा,चिकेन ,रोटी ,सब्जी ,दही वगैरा भी देना शुरू कियाहम कैरी को सिर्फ़ मांसाहारी खाने पर नही रखना चाहते थेक्यूंकि हमने सुना है की सिर्फ़ मांसहारी खाना खाने से doggi ज्यादा वोइलेंट होते है

और फ़िर शुरू हुई ट्रेनिंग बिस्तर पर और ड्राइंग रूम मे सोफे पर ना चढ़ने की क्यूंकि हमे कैरी से प्यार तो था पर उसका बिस्तर पर चढ़ना गवारा नही थाहाँ बेटों के रूम और बिस्तर पर कैरी अपना पूरा अधिकार समझता हैपर कैरी ना तो हमारे कमरे मे आता था और ना ही बिस्तर पर चढ़ता थाबस हमारे कमरे के दरवाजे पर ही बैठ जाता था

और अब आई असली ट्रेनिंग की बारी यानी walk करने कीशुरू मे घर मे walk कराया गया तो लीश पर चलता ही नही थाजहाँ लीश बांधते की वो उछलने लगता थाखैर रोज शाम को आधे घंटे का ट्रेनिंग कार्यक्रम चलता रहा और थोड़े दिन उसने ठीक से walk करना सीख लिया। कैरी ने जब ठीक से लीश पर चलना शुरू किया तो घर के पास थोड़ा थोड़ा walk के लिए बाहर निकलना शुरू कियाऔर फ़िर रोज शाम को walk के लिए घर से बाहर निकलना शुरू कियापहले तो हमने कह दिया था की हम कैरी को टहलाने नही जाया करेंगे पर बाद मे हम और पतिदेव ही कैरी को walk के लिए ले जाने लगेइसे लेकर जब हम लोग बाहर निकलते थे तो ऐसा लगता था मानो सारे शहर के doggi इसके पीछे पड़ गए होऔर कैरी बेचारा डर के मारे वापिस घर की ओर भागने लगता थाऔर कैरी से ज्यादा हमे डर लगता की अगर कहीं सब doggi ने अटैक कर दिया तो हम किसको बचायेंगेपर जल्द ही ये डर ख़त्म हो गया क्यूंकि जब रोज-रोज walk के लिए जाने लगे तो सब कैरी को पहचानने लगे थे

1 comment:

पंकज अवधिया Pankaj Oudhia said...

चलिये अब मन बनने लगा है कि एक डागी भी पाले।